कहानी अपने समय के अंतर्विरोधों और सामाजिक परिवेश के द्वंद्वात्मक संबध से ही उत्पन्न होती है । जीवन के एक कालखंड और चरित्र के माध्यम से कहानी जब किसीविशेष क्षण में निहित अंतर्द्वंद्व को पकडती है तो वह समाज और सभयता के किसी विराट अंत:संघर्ष को ही दिखाने का प्रयास करती है । कहानी में यह समय सतह पर नहीं दिखाई देता और इसके लिये उसे अपने परिवेश की जटिल, बहुस्तरीय संरचना की विस....
