गजल-1
उनकी किस्मत संवारता हूं मैं
एक-दो लोगों का खुदा हूं मैं
तेरी यादों के पर कतर के ही
दिल के पिंजरे को खोलता हूं मैं
फैसले दिल से लेता था सारे
जेहन के शहर में नया हूं मैं
खामुशी था जबान वालों की
बे-जबानों की अब सदा हूं मैं
किसने आवाज दी है पीछे से
किसके खाति....
