अमृता पांडे

विक्षिप्त कौन?

हमेशा सुनसान रहने वाले टूटे-फूटे मकान के बाहर आज लोगों की भीड़ थी। कोई कह रहा था कि अच्छा हुआ बेचारी मर गई। कोई कहता कि चलो, पगली को यातनाओं से मुक्ति मिल गई। कुछ लोग कमरे के अंदर घुस गए थे। मानो तहकीकात करने की जिम्मेदारी उन्हीं को सौंप दी गई हो। ---और उधर रजनी ईजा के शव से लिपटकर रो-रोकर बेहाल हुए जा रही थी। 
चारों ओर से पहाड़ियों से घिरी हुई घाटी में बसा गांव। शा....

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