दिलीप कुमार

अथ आलोचना कथा

‘दोस्तों आजकल मंच पर नहीं,
नेपथ्य में संभावना है’
उस्ताद शायर दुष्यंत कुमार साहब ने यह बात जब कही थी तब किसी को आयडिया नहीं रहा होगा कि आने वाले दिनों में हिंदी साहित्य का सबसे फलदार वृक्ष आलोचना ही होगा और सबसे तेवरदार हैसियत आलोचक की होगी। आलोचना पहले मिशन थी फिर प्रोफेशन हुई और अब स्टाइल और स्टेट्स सिंबल बनकर रह गई है। कुछ बरस पहले तक हिंदी साहित्य ....

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