अश्विनी कुमार

अश्विनी कुमार की कविताएं


आजकल मेरे शहर में...

आजकल मेरे शहर के मंदिरों और दरगाहों पर भीड़ कुछ ज्यादा हैµ
लोग चकमक पत्थरों की रौशनी में ढूंढ़ रहे हैं,
एक ऐसी भाषा, जिसमें युद्ध का नाम न हो,
हिंसा का अनुवाद न हो सकेµ
सिर्फ बचे रहें शब्द, अंधेरे में खिले हुए
सूरजमुखी फूल की तरह।
गर्भवती औरतें औलिया की मजारों पर
मन्नतों के धागे बांध रही हैंµ
हर धागे में ....

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