हिमांशु विश्वकर्मा

हिमांशु विश्वकर्मा की कविताएं

अलगाव के बाद 

उसने हेगल को कभी 
नहीं पढ़ा 
न ही वह कभी समझ पाया कि 
उसकी मानसिक स्थिति
उसके विचार
उसकी प्रतिक्रियाओं पर 
पिछली कई सभ्यताओं में 
पहले ही लिखा जा चुका है
बार---बार
बार---बार 

वह जीवन को हर बार 
समझना चाहता है 
हर उकाल1 से पहले 
क्वेराल2 के पेड़ के नीचे बैठकर 
एक गहरी सांस में&....

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