कविता जब अपने समय से आंख मिलाती है तब वह केवल सौंदर्य का उपकरण नहीं रहती, वह प्रश्न बन जाती है, हस्तक्षेप बन जाती है और कई बार प्रतिरोध भी। वीणा अमृत का कविता-संग्रह ‘मेरे हिस्से का आसमान’ इसी अर्थ में एक सजग स्त्री-स्वर की दस्तावेजी यात्र है जो निजी अनुभव से चलकर सामाजिक, नैतिक और आध्यात्मिक धरातल तक पहुंचती है। यह संग्रह किसी एक भाव या एक विषय में सीमित नही....
