‘आत्मसम्भवा आंडाल’ सुभाष राय द्वारा लिखित एक ऐसी कृति है जो इतिहास में दर्ज ऐसी स्त्री को रेखांकित करती है जो भक्ति के धरातल पर खड़े होकर स्त्री अनुभूतियों, स्त्री स्वायतत्ता, स्त्री अस्तित्व और दार्शनिकता का आख्यान रचती है। आंडाल केवल तमिल वैष्णव संत कवयित्री के रूप में उपस्थित नहीं होतीं, बल्कि स्त्री चेतना का मुखर स्वर बनकर उभरती हैं। बेशक व्याख्याक....
