हिंदी की जानी-मानी कथाकार और स्त्री विमर्श की सशक्त पैरोपकार रजनी गुप्त का संस्मरण ‘धरा पर धूप’ प्रकाशित हुआ है। पुस्तक का शीर्षक ‘धरा पर धूप’ पाठकों के मन में एक कुतूहल और जिज्ञासा उत्पन्न करता है। जबकि वसुंधरा पर सभी जीव-जंतु तथा अन्य प्राणियों को अपने हिस्से की धूप पाने का पूरा हक है। लेकिन क्या सभी को अपने हिस्से की धूप मिल पाती है? क्या सभी को अपन....
