सरोजिनी नौटियाल

भगवती चरण वर्मा का स्त्री चिंतन

बीसवीं सदी के प्रारंभिक दौर को भारत का बेचैन काल कह सकते हैं। बहुत कुछ ऐसा जमा हो गया था जिससे भारत छुटकारा पाना चाहता था। उसे अंग्रेजी शासन की गुलामी से आजादी चाहिए थी। सामाजिक रूढ़ियों के जाल को तोड़ना था। धार्मिक अंधविश्वास के चक्रव्यूह से निकलना था। अकाल और भुखमरी से निजात पानी थी। निरक्षरों की भीड़ को साक्षर नागरिक बनाना था। समय का वह दौर भारत के लिए वाकई ब....

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