प्रेमचंद की उपस्थिति के बहाने मैं सबसे पहले उनके पुत्र अमृत राय द्वारा बच्चों के लिए लिखी गई प्रेमचंद की जीवनी का जिक्र करते हुए अपनी बात आरंभ कर रहा हूं। राष्ट्रीय पुस्तक न्यास द्वारा नेहरु बाल पुस्तकालय शृंखला की 47वीं पुस्तक के रूप में सन् 1978 ई में प्रकाशित इस कृति को पाने का सुयोग मुझे सन् 1984 ई- में मिला था।
जीवन का आरंभ केरल से प्रेमचंद को मिलने आए चंद्....
